यूनानी चिकित्सा पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन व यूनानी दिवस

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 10 फरवरी, 2018 को दो दिवसीय (10-11 फरवरी) यूनानी चिकित्सा पर  अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
  • यह सम्मेलन ‘चिकित्सा की मुख्यधारा में यूनानी चिकित्सा पद्धति का एकीकरण’ थीम के साथ आयोजित हुआ। 
  • द्वितीय ‘यूनानी दिवस’ समारोह के भाग के रूप में नई दिल्ली में इस सम्मेलन का आयोजन हुआ।
  • पूरे विश्व में मेनस्ट्रीम हेल्थ सिस्टम (एलोपैथिक) के साथ यूनानी चिकित्सा के एकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

क्या है यूनानी दिवस?

  • प्रतिवर्ष हकीम अजमल खान की जयंती पर 11 फरवरी को ‘यूनानी दिवस’ मनाया जाता है।
  • प्रथम यूनानी दिवस वर्ष 2017 में हैदराबाद में मनाया गया।

कौन थे हकीम अजमल खान?

  • हकीम अजमल खान, जिनका जन्म 11 फरवरी 1868 को जन्म हुआ था, यूनानी चिकित्सा पद्धति में वैज्ञानिक अनुसंधान के संस्थापक थे।
  • यूनानी चिकित्सा पद्धति में उनके अप्रतीम योगदान को पहचान देने के लिए आयुष मंत्रालय ने प्रतिवर्ष 11 फरवरी को यूनानी दिवस मनाने की घोषणा की थी।  
  • हैदराबाद स्थित केन्द्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में पहला यूनानी दिवस मनाया गया।





क्या है यूनानी चिकित्सा पद्धति?

  • यूनानी चिकित्सा जिसे यूनानी-टिब्ब भी कहा जाता है, मध्य-पूर्व और दक्षिण-एशियाई देशों में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का एक रूप है।
  • यह ग्रीक-अरबी चिकित्सा परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है जो यूनानी चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स (बुकरात) और रोमन चिकित्सक गैलेन की शिक्षाओं पर आधारित है और इसे विस्तृत चिकित्सा पद्धति का स्वरूप प्रदान करने का श्रेय राज्स (अल रजी), एविसेना (इब्न-ए-सिना), अल-ज”ावी और इब्न नाफिस जैसे मध्य युगीन अरब और फारसी चिकित्सकों को जाता है।
  • कहा जाता है कि यह चिकित्सा पद्धति ग्रीस में लगभग 2500 साल पहले पैदा हुयी थी। 
  • यह चिकित्सा पद्धति हर्ब-एनोमो-मूल खनिज का मिश्रित रूप है जिसमें 90% हर्बल, 4.5% जानवर अंश और 5.6% खनिज मिले होते हैं। 

 क्या है आयुष मंत्रालय?

  • भारत में आयुष प्रणाली की स्वास्थ्य पद्धति के विकास व प्रसार हेतु 9 नवंबर 2014 को एक अलग आयुष मंत्रालय का गठन किया गया। 
  • पहले इस मंत्रालय को भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी विभाग (आईएसएमएंडएच) के रूप में जाना जाता था, जिसका गठन मार्च 1995 में किया गया था। नवंबर 2003 में इसका नाम बदलकर आयुर्वेद, योग और नैचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) विभाग कर दिया गया था। 


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