विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2018

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी, 2018 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ‘विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन-2018’ (World Sustainable Development Summit-2018) के दूसरे संस्करण का उद्घाटन किया। वैसे यह तीन दिवसीय सम्मेलन 15-17 फरवरी, 2018 के बीच नई दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। 
  • मेजबानः शिखर सम्मेलन ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट’, टेरी (The Energy and Resources Institute: TERI) का फ्लैगशिप मंच है और इसका आयोजन इसी संस्थान द्वारा किया गया।
  • प्रतिभागीः केंद्रीय मंत्रियों, दुनिया भर के कई नीति निर्माता, शोधकर्ता, राजनयिक और कॉरपोरेट्स सहित 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 
  • थीमः तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन की थीम है: ‘रिजिएलेंट ग्रह के लिए साझेदारी’ (partnerships for a resilient planet) है जो जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि में कुछ सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान हेतु विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक फोरम की संकल्पना रखती है। 
  • उद्देश्यः यह सम्मेलन एक साझा मंच पर सतत विकास, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र में वैश्विक नेताओं और विचारकों को एकजुट करने का प्रयास करता है। सम्मेलन में भूमि क्षरण, अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र, वायु प्रदूषण का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने और जलवायु परिवर्तन शमन के लिए प्रभावी वित्तीय तंत्र पर विचार किया जाना है।

क्या है विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन? 

  • सतत विकास विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन की परिघटना दिशा में कार्रवाई में तेजी लाने के लिए एक मंच के रूप में विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन की अवधारणा विकसित हुयी है।  
  • सतत विकास के समक्ष खड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए विश्व के कुशाग्र व अग्रणी विचारकों को एक साथ लाने की कोशिश करता है
  • सम्मेलन का यह दूसरा संस्करण ‘दिल्ली सतत विकास सम्मेलन’ की सफलता और विरासत पर आधारित है जो सतत विकास के मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रमुऽ मंच था। दिल्ली सम्मेलन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रलय के तत्वावधान में आयोजित ट्रैक 2 कूटनीति का प्रतीक था।
  • वैश्विक समुदाय तक शिखर सम्मेलन का विस्तार और पहुंच बढ़ाने के लिए वर्ष 2016 में डीएसडीएस विश्व सतत विकास सम्मेलन में स्थानांतरित हो गया।

क्या है टेरी?

  • ऊर्जा और संसाधन संस्थान यानी टीईआरआई (The Energy and Resources Institute:TERI), जिसकी स्थापना 1974 में हुयी, भारत और ग्लोबल साउथ के टिकाऊ विकास के लिए शोध करने के लिए समर्पित एक अग्रणी थिंक टैंक है।
  • यह ऊर्जा के मुद्दों पर एक सूचना केंद्र के रूप में इसे स्थापित किया गया था। हालांकि, बाद के दशकों में, यह एक अनुसंधान संस्थान का स्वरूप ले लिया जिसकी नीति और प्रौद्योगिकी समाधान ने लोगों के जीवन और पर्यावरण को बदलने में महत्ती भूमिका निभायी है। 



Written by 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *