सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी) परीक्षा प्रणाली एवं पाठ्यक्रम

आयु सीमाः यूपीएससी (IAS) सिविल सेवा परीक्षा/आईएएस में शामिल होने के लिए न्यूनतम एवं अधिकतम उम्र सीमा श्रेणीवार निम्नलिखित हैः
1. परीक्षा वर्ष में 1 अगस्त को न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और अधिकतम 30 वर्ष
2. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रें को अधिकतम उम्र सीमा में पांच वर्ष की छूट दी जाती है यानी परीक्षा वर्ष के 1 अगस्त 3. को यदि उनकी आयु 35 वर्ष या उससे कम हैं तो वे सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के लिए पात्र होते हैं।

शैक्षणिक अर्हताः आईएएस परीक्षा के अभ्यर्थियों के पास भारत के केन्द्र या राज्य विधानमंडल द्वारा निगमित किसी विश्वविद्यालय की या संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के खंड 3 के अधीन विश्वविद्यालय के रूप में मानी गई किसी अन्य शिक्षा संस्था की डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता होनी चाहिए।
1. जो छात्र सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवेदन देते समय स्नातक के अंतिम वर्ष की परीक्षा दे चुका है पर उसका परिणाम जारी नहीं किया जा सका है, वे भी प्रारंभिक परीक्षा में बैठने के लिए पात्र होते हैं, परंतु उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन देते समय अपने सभी प्रमाणपत्रें की छायाप्रति देनी होगी। अर्थात मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन देते समय (अमूमन परीक्षा वर्ष के सितंबर माह) उन्हें स्नातक परीक्षा जरूर पास कर लेनी होगी।
2. विशेष परिस्थितियों में यूपीएससी ऐसे किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा में प्रवेश पाने का पात्र मान सकता है जिसके पास उपर्युक्त अर्हताओं में से कोई अर्हता न हो, बशर्ते कि उम्मीदवार ने किसी संस्था द्वारा ली गई कोई ऐसी परीक्षा पास कर ली हो जिसका स्तर आयोग के मतानुसार ऐसा हो कि उसके आधार पर उम्मीदवार को उक्त परीक्षा में बैठने दिया जा सकता है।
3. जिन उम्मीदवारों के पास ऐसी व्यावसायिक और तकनीकी योग्यताएं हों, जो सरकार द्वारा व्यावसायिक और तकनीकी डिग्रियों के समकक्ष मान्यता प्राप्त हैं वे भी उक्त परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे।
4. जिन उम्मीदवारों ने अपनी अंतिम व्यावसायिक एमबीबीएस अथवा कोई अन्य चिकित्सा परीक्षा पास की हो लेकिन उन्होंने सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा का आवेदन प्रपत्र प्रस्तुत करते समय अपना इण्टर्नशिप पूरा नहीं किया है तो वे भी अनन्तिम रूप से परीक्षा में बैठ सकते हैं, बशर्ते कि वे  अपने आवेदन-प्रपत्र के साथ संबंधित विश्वविद्यालय/संस्था के प्राधिकारी से इस आशय के प्रमाणपत्र की एक प्रति प्रस्तुत करें कि उन्होंने अपेक्षित अंतिम व्यावसायिक चिकित्सा परीक्षा पास कर ली है। ऐसे मामलों में उम्मीदवारों को साक्षात्कार के समय विश्वविद्यालय/ संस्था के संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अपनी मूल डिग्री अथवा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे कि उन्होंने डिग्री प्रदान करने हेतु सभी अपेक्षाएं (जिनमें इण्टर्नशिप पूरा करना भी शामिल है) पूरी कर ली है।

अवसरों की संख्याः सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों के पास भारत के केन्द्र या राज्य विधानमंडल द्वारा निगमित किसी विश्वविद्यालय की या संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के खंड 3 के अधीन विश्वविद्यालय के रूप में मानी गई किसी अन्य शिक्षा संस्था की डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता होनी चाहिए।
स जो छात्र सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवेदन देते समय स्नातक के अंतिम वर्ष की परीक्षा दे चुका है पर उसका परिणाम जारी नहीं किया जा सका है, वे भी प्रारंभिक परीक्षा में बैठने के लिए पात्र होते हैं, परंतु उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन देते समय अपने सभी प्रमाणपत्रें की छायाप्रति देनी होगी। अर्थात मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन देते समय (अमूमन परीक्षा वर्ष के सितंबर माह) उन्हें स्नातक परीक्षा जरूर पास कर लेनी होगी।
1. विशेष परिस्थितियों में यूपीएससी ऐसे किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा में प्रवेश पाने का पात्र मान सकता है जिसके पास उपर्युक्त अर्हताओं में से कोई अर्हता न हो, बशर्ते कि उम्मीदवार ने किसी संस्था द्वारा ली गई कोई ऐसी परीक्षा पास कर ली हो जिसका स्तर आयोग के मतानुसार ऐसा हो कि उसके आधार पर उम्मीदवार को उक्त परीक्षा में बैठने दिया जा सकता है।
2. जिन उम्मीदवारों के पास ऐसी व्यावसायिक और तकनीकी योग्यताएं हों, जो सरकार द्वारा व्यावसायिक और तकनीकी डिग्रियों के समकक्ष मान्यता प्राप्त हैं वे भी उक्त परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे।
3. जिन उम्मीदवारों ने अपनी अंतिम व्यावसायिक एमबीबीएस अथवा कोई अन्य चिकित्सा परीक्षा पास की हो लेकिन उन्होंने सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा का आवेदन प्रपत्र प्रस्तुत करते समय अपना इण्टर्नशिप पूरा नहीं किया है तो वे भी अनन्तिम रूप से परीक्षा में बैठ सकते हैं, बशर्ते कि वे अपने आवेदन-प्रपत्र के साथ संबंधित विश्वविद्यालय/संस्था के प्राधिकारी से इस आशय के प्रमाणपत्र की एक प्रति प्रस्तुत करें कि उन्होंने अपेक्षित अंतिम व्यावसायिक चिकित्सा परीक्षा पास कर ली है। ऐसे मामलों में उम्मीदवारों को साक्षात्कार के समय विश्वविद्यालय/ संस्था के संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अपनी मूल डिग्री अथवा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे कि उन्होंने डिग्री प्रदान करने हेतु सभी अपेक्षाएं (जिनमें इण्टर्नशिप पूरा करना भी शामिल है) पूरी कर ली है।

-प्रारंभिक परीक्षा में बैठने को परीक्षा में बैठने का एक अवसर माना जाता है।
– यदि उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा के किसी एक प्रश्न पत्र में वस्तुतः परीक्षा देता है तो उसका परीक्षा के लिए एक अवसर समझा जाता है।
– अयोग्यता/उम्मीदवारी के रद्द होने के बावजूद उम्मीदवार की परीक्षा में उपस्थिति का तथ्य एक अवसर गिना जाता है।

चयन प्रक्रिया
-आईएएस परीक्षा तीन चरणों में आयोजित होती है। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार।

प्रारंभिक परीक्षा
प्रारंभिक परीक्षा वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय प्रश्न) प्रकृति की है और इसमें दो प्रश्न पत्र होते हैं_ सामान्य अध्ययन प्रथम एवं सामान्य अध्ययन द्वितीय। प्रत्येक पत्र 200-200 अंकों का होता है। द्वितीय प्रश्न पत्र क्वालीफाइंग होता है।
प्रारंभिक परीक्षा केवल क्वालीफाइंग परीक्षा है।
सामान्य अध्ययन प्रथम पत्रः 100 प्रश्न (200 अंक)
1. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं,
2. भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन,
3. भारत एवं विश्व भूगोलः भारत एवं विश्व का प्र्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल
4. भारतीय राजव्यवस्था और शासन-संविधान, राजनैतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोक नीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे, आदि।
5. आर्थिक और सामाजिक विकास-सतत विकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में पहलें आदि।
6. पर्यावरणीय पारिस्थितिकी पर सामान्य मुद्दें, जैव विविधता व जलवायु परिवर्तन-विशेष अध्ययन की जरूरत नहीं।
7. सामान्य विज्ञान
सामान्य अध्ययन पत्र-2 (200 अंक) अवधि: दो घंटे
1- कंप्रीहेंसन
2- संचार कौशल सहित अंतर-वैयक्तिक कौशल,
3- तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता,
4- निर्णयन और समस्या समाधान,
5- सामान्य मानसिक योग्यता,
6- आधारभूत संख्यनन (संख्याएं और उनके संबंध, विस्तार क्रम आदि) (दसवीं कक्षा का स्तर), आंकड़ों का निर्वचन (चार्ट, ग्राफ, तालिका, आंकड़ों की पर्याप्तता आदि-दसवीं कक्षा का स्तर)
(सामान्य अध्ययन द्वितीय पत्र महज क्वालीफाइंग है और इसमें न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। परंतु इसके अंक जोड़े नहीं जाते।)
नेगेटिव मार्किंगः प्रारंभिक परीक्षा में एक उत्तर गलत होने पर एक तिहाई अंक (0.33) अंक काटे जाएंगे।
मुख्य परीक्षा प्रणाली
मुख्य परीक्षा निम्नलिखित प्रश्नपत्र होते हैं_
क्वालीफाइंग पत्र
प्रश्न पत्र कः संविधान की आठवीं अनसूूची में सम्मिलत भाषाओं में से उम्मीदवारों द्वारा चुनी गई कोई एक भारतीय भाषा। कुल अंकः 300
प्रश्न पत्र खः अंग्रेजी, कुल अंकः 300
-इन दोनों प्रश्नपत्रें में न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य है, इनमें न्यूनतम अंक नहीं लाने पर शेष पत्रें की उत्तर पुस्तिका नहीं जांची जाती। पर इनके अंक मेरिट तैयार करने में नहीं जोड़े जाते।
अनिवार्य पत्र
प्रश्न पत्र-1ः निबंध, कुल अंकः 250
प्रश्न पत्र-2ः सामान्य अध्ययन 1 (भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज) कुल अंकः 250
प्रश्न पत्र-3ः सामान्य अध्ययन 2 (शासन व्यवस्था, संविधान, शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध), कुल अंक-250
प्रश्न पत्र-4ः सामान्य अध्ययन 3 (प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन), कुल अंक-250,
प्रश्न पत्र-5ः सामान्य अध्ययन 4 (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरूचि), कुल अंक-250
प्रश्न पत्र-6ः वैकल्पिक विषय प्रथम पत्र, कुल अंक-250
प्रश्न पत्र-7ः वैकल्पिक विषय द्वितीय पत्र, कुल अंक-250
लिखित परीक्षा कुल अंकः 1750
साक्षात्कारः 275 अंक
कुल योगः 2075

साक्षात्कार (275 अंक)
-जो उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिखित भाग में आयोग के विवेकानुसार यथानिर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक प्राप्त करते हैं उन्हें व्यक्तित्व परीक्षण के लिए साक्षात्कार हेतु आमंत्रित किया जाता है।
-साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या भरी जाने वाली कुल रिक्तियों की संख्या से लगभग दुगनी होती है।