जीएसटी के एक वर्ष पूरे होने पर 1 जुलाई, 2018 को ‘जीएसटी दिवस‘

  • भारत सरकार भारतीय कर प्रणाली में अभूतपूर्व सुधार अर्थात वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अस्तित्व में आने के एक वर्ष पूरे होने पर  1 जुलाई, 2018 को ‘जीएसटी दिवस‘ के रूप में मनाया जा रहा है। पहला वर्ष सामने आने वाली विभिन्न प्रकार की चुनौतियों एवं नीति निर्माताओं तथा कर प्रशासकों की इनसे बेहतर तरीके से निपटने की इच्छा और क्षमता दोनों ही रूप से उल्लेखनीय रहा है।
  • जीएसटी का पहला वर्ष विश्व के लिए भारतीय करदाताओं के भारतीय कर प्रणाली में आए इस अभूतपूर्व सुधार में प्रतिभागी बनने का उदाहरण रहा है। इसी के अनुरूप, फैसला किया गया है कि 1 जुलाई, 2018 को ‘जीएसटी दिवस‘ के रूप में मनाया जाए। 
  •  जीएसटी के कार्यान्वयन से पहले, भारतीय कराधान प्रणाली केंद्रीय, राज्य एवं स्थानीय क्षेत्र लेवियों का एक मिश्रण था। जीएसटी के लिए संविधान में संशोधन के लिए जो बहस हुई, उनमें ऐसे तमाम मुद्वे थे जिनके लिए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच समाधान एवं सहमति की आवश्यकता थी।
  • जीएसटी से संबंधित 122वां संविधान संशोधन विधेयक 2014, संसद् में 19 दिसंबर, 2015 के पेश किया गया और 16 सितंबर, 2016 को 101वें संविधान संशोधन के रूप में यह अधिसूचित हुुआ।
  • जैसाकि संविधान की धारा 279ए में प्रावधान है, वस्तु एवं सेवा कर परिषद (परिषद) 12 सितंबर, 2016 को अधिसूचित एवं प्रभावी हुई।
  •  जीएसटी सहकारी संघवाद का उचित उपहार है क्योंकि जीएसटी परिषद की अभी तक आयोजित 27 बैठकों में सभी निर्णयों पर सर्वसहमति से फैसला किया गया और ऐसा कोई अवसर नहीं आया कि किसी मसले पर निर्णय के लिए वोट कराने की स्थिति पैदा हो।
  •  चार कानूनों, जिनके नाम हैं- सीजीएसटी अधिनियम, यूटीजीएसटी अधिनियम, आईजीएसटी अधिनियम एवं जीएसटी (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, को संसद द्वारा पारित किया गया और 12 अप्रैल, 2017 से इन्हें अधिसूचित कर दिया गया है। सभी राज्यों (जम्मू कश्मीर को छोड़कर) एवं संघ शासित प्रदेशों ने अपने संबंधित एसजीएसटी अधिनियमों को पारित कर दिया है।
  •   भारत ने दोहरे जीएसटी मॉडल को इसकी अनूठी संघीय प्रकृति के कारण अंगीकार किया है।
  •  ई-वे (इलेक्ट्रॉनिक वे) विधेयक के लागू किए जाने से देश भर में वस्तुओं की बाधामुक्त आवाजाही सुनिश्चित हुई है। 1 अप्रैल, 2018 से ई-वे बिल प्रणाली लागू हुई है।
  •  निर्यातकों, छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों, कृषि एवं उद्योग, आम उपभोक्ताओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों को होने वाले लाभ की वजह से जीएसटी का अर्थव्यवस्था पर कई प्रकार से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  •   सरकार ने जीएसटी पोर्टल पर तकनीकी गड़बडि़यों के कारण करदाताओं को होने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए एक आईटी समस्या समाधान तंत्र विकसित किया है।
  • सरकार के अनुसारजीएसटी को लाूग किए जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था में रूपांतरकारी परिवर्तन आया है। जीएसटी से बहु-स्तरीय, जटिल अप्रत्यक्ष कर संरचना की जगह एक सरल, पारदर्शी एवं प्रौद्योगिकी आधारित कर व्यवस्था अस्तित्व में आई है। यह व्यवस्था अंतःराज्य व्यापार एवं वाणिज्य की बाधाओं को समाप्त करने के द्वारा एकल, एकसमान बाजार में भारत को समेकित कर देगी। 

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