भारत स्थित न्यूट्रिनो प्रयोगशाला को पर्यावरणीय मंजूरी

क्याः न्यूट्रिनो प्रयोगशाला
कहांः थेनी (बोदी पहाड़ी), तमिलनाडु
किसलिएः बुनियादी शोध

  • केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रलय ने भारत स्थित न्यूट्रिनो प्रयोगशाला को विशेष मामला मानते हुये तमिलनाडु के थेनी जिला में स्थित बोदी पश्चिमी पहाड़ी में इसकी स्थापना को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी है।
  • पर्यावरण मंत्रलय की विशेषज्ञ कमेटी (Expert Appraisal Committee) 5 मार्च, 2018 की अपनी बैठक में परियोजना को मंजूरी दी।
  • कमेटी को इस तथ्य से अवगत कराया गया कि परियोजना से रेडियोएक्टिविटी व जल की लिचिंग का खतरा मौजूदद नहीं है। यह भी कि ब्लास्टिंग का आसपास की प्रवास को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।
  • वैसे इस परियोजना को कतिपय शर्तों के अधीन मंजूरी प्रदान की गई है। इन शर्तों में एक शर्त तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना व संचालन की मंजूरी लेने से है। 

न्यूट्रिनो प्रयोगशाला परियोजना के बारे में

  • इस परियोजना के तहत बोदी पहाड़ी के पास भूमिगत प्रयोगशाला में आकार की एक बड़ी गुफा और कई छोटी-छोटी गुफाओं का निर्माण किया जाना है जिस तक 1900 मीटर लंबी व 7-5 मीटर चौड़ी सुरंग के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।
  • यह परमाणु ऊर्जा विभाग एवं विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से समर्थित है और परमाणु ऊर्जा विभाग नोडल एजेंसी है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य आधार कण (पर्टिकल) न्यूट्रिनो पर शोध करना है।
  • इस परियोजना से पूरे देश में, विशेष रूप से तमिलनाडु के थेनी व मदुरई में बुनियादी विज्ञान शोध में अभिरुचि जगेगी।

क्या है न्यूट्रिनो?

  • न्यूट्रिनो लेप्टन परिवार से संबंधित मूलभूत कण है।
  • इसके तीन रूप हैं; एक का संबंध इलेक्ट्रॉन से है जबकि दो म्यूओन व ताउ हैं।
  • पर्टिकल फिजिक्स के स्टैंडर्ड मॉडल के अनुसार यह द्रव्यमान रहित हैं। हालांकि हाल के शोध बताते हैं कि इनके पास निश्चित व लघु द्रव्यमान हैं।



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