भारत में जैविक खेती हेतु किये जा रहे प्रयास

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के अनुसार कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग चिंता का विषय है और पर्यावरण, सामाजिक-आर्थिक एवं उत्पादन के मोर्चों पर इसके व्यापक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस ओर सरकार का ध्यान गया है। नई दिल्ली में जैविक खेती पर आयोजित एसोचैम के राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने भारत में जैविक खेती हेतु किये जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया किया।

  • भारत परम्परागत रूप से विश्व में जैविक खेती करने वाला सबसे बड़ा देश है। भारत के अनेक हिस्सों में जैविक खेती पहले से ही परम्परागत ज्ञान के आधार पर की जा रही है।
  • उनके मुताबिक सरकार भारत को कृषि क्षेत्र में आधुनिकता के पथ पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और वह नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन में सतत वृद्धि के लिए सरकार प्राथमिकता के आधार पर जैविक खेती को बढ़ावा देती रही है।
  • सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए लगभग 23 लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए उपयुक्त बनाया गया है।
  • सरकार ने परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) शुरू की है जिसके तहत दो लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए उपयुक्त बनाया गया है और इस तरह से पांच लाख किसान लाभान्वित हुए है।
  • राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र का मुख्य उद्देश्य देश में जैविक खेती को बढ़ावा देना है। अन्य सरकारी संस्थान जैसे कि एपीडा और वाणिज्य मंत्रालय प्रमाणन प्रणाली में सुधार एवं नियंत्रण में मुख्य भूमिका निभाते हुए जैविक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं।
    सरकार ने ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास’ की शुरुआत की है। मंत्रालय का उद्देश्य पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देना है क्योंकि इन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग का स्तर अत्यंत कम है।
  • सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के दायरे में 50,000 हेक्टेयर भूमि को लाना है जिनमें से 45,918 हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के लिए उपयुक्त बना दिया गया है और 2429 किसान हित समूह गठित किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 48949 किसान इस योजना से जुड़ गए हैं।  
  • ज्ञातव्य है की सिक्किम, भारत का प्रथम जैविक राज्य बन गया है.

क्या है जैविक खेती (Organic Farming or Agriculture)?

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (यूनएफएओ) के अनुसार जैविक खेती (आर्गेनिक खेती या कृषि) ऐसी प्रणाली है जो बाह्य कृषि इनपुट के बजाय इकोसिस्टम मैनेजमेंट पर निर्भर करती है।
  • यह वह प्रणाली है जिसमें सिंथेटिक उर्वरकों व कीटनाशकों जैसे कृत्रिम इनपुट की उपयोग की संभावना को समाप्त कर पर्यावरणीय व सामाजिक प्रभाव के बारे में सोचना आरंभ करती है।

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