भारत बना उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम का सदस्य

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के तहत उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम (एएमएफ टीसीपी-Advanced Motor Fuels Technology Collaboration Programme: AMF TCP) के सदस्य के रूप में भारत के इससे जुड़ने के बारे में अवगत कराया गया ।
  • भारत 9 मई, 2018 को इस कार्यक्रम के सदस्य के रूप में जुड़ा था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रूपरेखा के तहत एएमएफ टीसीपी काम करता है जिससे भारत का ‘जुड़ाव’ दर्जा 30 मार्च, 2017 से ही है।
  • भारत सरकार का पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 9 मई, 2018 को उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से इसके 16वें सदस्य के रूप में जुड़ा है। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम के अन्य सदस्यों में अमेरिका, चीन, जापान, कनाडा, चिली, इजरायल, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क, स्पेन, कोरिया गणराज्य, स्विट्जरलैंड और थाईलैंड शामिल हैं।

मुख्य लक्ष्य 

  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा एएमएफ टीसीपी से जुड़ने का मुख्य लक्ष्य उन्नत मोटर ईंधनों/वैकल्पिक ईंधनों को बाजार में पेश करने को सुविधाजनक बनाना है, ताकि उत्सर्जन कम हो सके और इसके साथ ही परिवहन क्षेत्र में उच्च ईंधन दक्षता हासिल की जा सके।
  • उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से ईंधन का विश्लेषण करने, परिवहन क्षेत्र में उपयोग के लिए नये/वैकल्पिक ईंधनों की पहचान करने और ईंधन गहन क्षेत्रों में उत्सर्जन में कमी के लिए संबद्ध अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों का पता लगाने के भी अवसर मिलेंगे।  
  • उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्य को ‘अनुलग्नक (एनेक्स)’ नामक व्यक्तिगत परियोजनाओँ के अंतर्गत किया जाता है। विगत वर्षों के दौरान उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत 50 से भी अधिक अनुलग्नकों की शुरुआत की गई है और पूर्ववर्ती अनुलग्नकों में अनेक ईंधनों जैसे कि पुनर्निरूपित ईंधनों (गैसोलीन एवं डीजल), जैव ईंधनों (एथनॉल, बायोडीजल इत्यादि), कृत्रिम ईंधनों (मेथनॉल, फिशर-ट्रॉप्च, डीएमई इत्यादि) और गैसीय ईंधनों को कवर किया गया है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के अनुसंधान एवं विकास संस्थान और वाहन परीक्षण एजेंसियों जैसे कि एआरएआई, सीआईआरटी, आईसीएटी, इत्यादि के पास अत्याधुनिक सुविधाएं हैं और इसके साथ ही संसाधन भी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की सहभागिता वाले अनुलग्नकों में योगदान देंगे।
  • प्रधानमंत्री ने ‘ऊर्जा संगम, 2015’ में वर्ष 2022 तक ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले आयात में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत कार्य योजना पेश किये हैं जिसमें जैव ईंधनों और उन्नत/वैकल्पिक ईंधनों के साथ-साथ ईंधन दक्षता भी अहम भूमिका निभाएगी। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से जुड़ने से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को परिवहन क्षेत्र के लिए उच्च दक्षता एवं कम उत्सर्जन वाले उपयुक्त ईंधनों की पहचान एवं उपयोग करने में मदद मिलेगी।
  • भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 को अधिसूचित किया है जिसमें उन्नत जैव ईंधनों जैसे कि 2जी एथनॉल, जैव-सीएनजी, जैवमेथनॉल, ड्रॉप-इन ईंधनों, डीएमई, इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर विशेष जोर देने पर फोकस किया जा रहा है। इन उन्नत ईंधनों को विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों जैसे कि फसल अवशेष, नगर निगम के ठोस कचरे, औद्योगिक अपशिष्ट, अपशिष्ट से निकलने वाली गैसों, खाद्य अपशिष्ट, प्लास्टिक इत्यादि से तैयार किया जा सकता है। वैसे तो इनमें से कुछ उन्नत जैव ईंधनों का सफलतापूर्वक उपयोग कुछ देशों में किया जा रहा है, लेकिन भारत अब भी परिवहन क्षेत्र में इनका उपयोग करने का इंतजार कर रहा है। ये उन्नत ईंधन वर्तमान में हमारे देश में विकास के आरंभिक चरणों में हैं और हमारी ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने हेतु इन ईंधनों को एक लाभप्रद विकल्प बनाने के लिए व्यापक अनुसंधान एवं विकास की जरूरत है। उन्नत मोटर ईँधन प्रौद्योगिकी गठबंधन कार्यक्रम से जुड़ाव हो जाने से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को निकट भविष्य में परिवहन क्षेत्र में उपयोग के लिए अनुकूल माने-जाने वाले उन्नत जैव ईंधनों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस तरह के मामलों में उन्नत जैव ईंधनों का उपयोग करने वाले सदस्य देशों के अनुभव भी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के काम आएंगे।

लाभ

  • एएमएफ टीसीपी से जुड़ने के लाभों में साझा लागत और एकत्रित तकनीकी संसाधन शामिल हैं। इसके तहत प्रयासों में दोहराव की जरूरत नहीं पड़ती है और इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संबंधी क्षमताएं मजबूत होती हैं।
  • इसके अलावा, अपनाए जाने वाले सर्वोत्तम तौर-तरीकों से जुड़ी सूचनाओँ एवं अनुसंधानकर्ताओँ के नेटवर्क का आदान-प्रदान होता है तथा इसके साथ ही अनुसंधान को व्यावहारिक कार्यान्वयन से जोड़ना संभव हो पाता है।
  • जीवाश्म ईंधनों के आयात के प्रतिस्थापन में उन्नत जैव ईंधनों और अन्य वाहन ईँधनों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए भारत इस कार्यक्रम का सदस्य बन जाने के बाद इन ईंधनों से संबंधित अपनी रुचि वाले अन्य क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास कार्य शुरू करेगा।

पृष्ठभूमि

  • ‘एएमएफ टीएसपी’ स्वच्छ एवं अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा दक्ष ईंधनों एवं वाहन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संबंधित देशों के बीच सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है। ‘एएमएफ टीएसपी’ की गतिविधियां अनुसंधान एवं विकास, उन्नत मोटर ईंधनों के उपयोग एवं प्रचार-प्रसार से जुड़ी हुई हैं और इसके तहत उत्पादन, वितरण और संबंधित पहलुओं के अंतिम उपयोग को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित ढंग से परिवहन ईंधन से जुड़े मुद्दों पर गौर किया जाता है।  

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