भारत और अमेरिका के बीच ‘2+2’ वार्ता में कॉमकासा समझौता

  • भारत और अमेरिका के विदेशी मंत्रियों एवं रक्षा मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच आयोजित प्रथम ‘2+2’ वार्ता का आयोजन 6 सितंबर, 2018 को नई दिल्ली में हुआ।
  • इस वार्ता में भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज एवं रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण तथा अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोपियो एवं रक्षा मंत्री जिम मैटिस शामिल हुए।
  • इस वार्ता में दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित ‘कॉमकासा’ (Communications Compatibility and Security Agreement:COMCASA) पर करार हुआ। इससे पहले अमेरिका इसी तरह का समझौता जापान और आस्ट्रेलिया से कर चुका है।
  • भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रलय) में एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति भी होगी। 
  • 2019 में भारत के पूर्वी तट पर अमेरिका के साथ पहली बार तीनों सेनायें संयुक्‍त अभ्‍यास करेंगी। कॉमकोसा, ‘सिसमोआ’ (Communication Interoperability and Security Memorandum Agreement-CISMOA) का भारतीय संस्करण है। 
  •  अमेरिका ने भारत को एसटीए टीयर-1 का दर्जा प्रदान किया है। 
  • हालांकि दोनों देशों के बीच विवाद ‘कात्सा’ ( Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act: CAATSA) को लेकर है। इसके तहत अमेरिका वैसे देशों के साथ व्यापार संबंधों में प्रतिबंध का रूख अपनाता है जो रूस के साथ रक्षा खरीदारी करता है। भारत, रूस से एस-400 ट्रॉयम्फ खरीदने पर अड़ा हुआ है और इस खरीद में कात्सा बाधक बन रहा है।
  • क्या है कॉमकासा?
    • किसी देश के साथ प्रचालकीय सैन्य संबंध के लिए यूएसए तीन रक्षा समझौतों को आवश्यक मानता है। इसी में से एक समझौता है कॉमकासा (COMCASA)। दो अन्य समझौते हैंः लेमोआ यानी लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (Logistics Exchange Memorandum of Agreement :LEMOA) और ‘बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट फॉर जियोस्पपेटियल को-ऑपरेशन यानी ‘बेका’ (Basic Exchange and Cooperation Agreement for Geo-spatial Cooperation: BECA)। इनमें से लेमोआ पर दोनों देशों के बीच अगस्त 2016 में समझौता हो चुका है जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल कर सकती हैं। तीसरा समझौता ‘बेका’ पर अभी कोई वार्ता आरंभ नहीं हुई है।
    • भारत के साथ अमेरिका का ‘कॉमकासा’ समझौता संपन्न  होने से भारत को यूएसए से संचार सुरक्षा उपकरण ट्रांसफर करने को वैधानिकता प्राप्त हो जाएगी जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच ‘अंतर-प्रचालकीयता’ (interoperability) संभव हो सकेगी।
    • इस समझौता के हो जाने से अमेरिका से आयातीत किसी भी रक्षा विमानों में अति सुरक्षित संचार उपकरण लगे होंगे। अभी अमेरिका से सी-130जे या पी8आई समुद्री निगरानी में कम सुरक्षित वाणिज्यिक उपकरण लगे हैं जिसे वजह से अन्य सैन्य मित्रों के साथ रियल टाइम डेटा साझा नहीं हो पाता।
    • अमेरिका साथ कॉमकोसा (सिसमोआ) समझौता के पश्चात भारत को सेंट्रिक्स प्रणाली तक भी पहुंच मिल गई है। सेंट्रिक्स का मतलब है कंबाइंड एंटरप्राइजेज रीजनल इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज सिस्टम (Combined Enterprise Regional Information Exchange System, or CENTRIXS) जो कि अमेरिका का सुरक्षित संचार प्रणाली नेटवर्क है। सेंट्रिक्स नेटवर्क से लैस नौसेनिक पोत अब सुरक्षित तरीके से अमेरिकी नौसेना से संचार कर सकता है।
    • यदि भारत अमेरिका से समुद्री गार्डियन ड्रोन का सैन्य संस्करण खरीदता है तब यह समझौता पर हस्ताक्षर होना जरूरी है।

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