अंतरराष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव, 2018

  • चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव (International Buddhist Conclave) 23-26 अगस्त, 2018 के बीच नई दिल्ली व अजंता में आयोजित हो रहा है। भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ गोविंद इस सम्मेलन का उद्घाटन 23 अगस्त को नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में करेंगे।
  • इस कॉन्क्लेव की थीम है, ‘बुद्धा मार्ग-सजीव विरासत’ (Buddha Path – The Living Heritage)’। इस थीम का उद्देश्य भारत में बौद्ध विरासत को दर्शाना तथा पर्यटन को बढ़ावा देना है।
  • इस कॉन्क्लेव का आयोजन केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय महाराष्ट्र, बिहार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित कर रहा है।
  • जापान इस कॉन्क्लेव का साझीदार देश है।
  • इस सम्मेलन में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, म्यांमार और श्रीलंका सहित 29 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
  • नई दिल्ली में इस सम्मेलन के पश्चात प्रतिनिधिायों को  राजगीर, नालंदा, बोधगया व सारनाथ की यात्रा पर ले जाया जाएगा। 
  • पर्यटन मंत्रालय दो वर्ष में एक बार अंतर्राष्‍ट्रीय बौद्ध सम्‍मेलन का आयोजन करता है। इससे पहले फरवरी, 2004 में नई दिल्‍ली और बोधगया में, फरवरी 2010 में नालंदा और बोधगया में, सितम्‍बर 2012 में वाराणसी और बोधगया में, सितम्बर 2014 में बोधगया और वाराणसी में तथा अक्‍टूबर 2016 में सारनाथ/वाराणसी और बोधगया में इसका आयोजन किया गया था।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय बौद्ध सम्‍मेलन का धार्मिक/आध्‍यात्मिक, शैक्षणिक, कूटनीतिक तथा व्‍यावसायिक महत्‍व है। पर्यटन मंत्रालय ने बौद्ध धर्म से जुड़े विभिन्‍न पंथों, विद्वानों, जन नेताओं, पत्रकारों और अंतर्राष्‍ट्रीय तथा घरेलू टूर ऑपरेटरों को आमंत्रित किया है ताकि देश के  बौद्ध सर्किट में दुनिया के अन्‍य भागों से आने वालों लोगों की संख्‍या बढ़ सके। आसियान क्षेत्र तथा जापान सहित बौद्ध आबादी वाले देशों से सम्‍मेलन में भागीदारी का बेहद महत्‍व है। 
  • भारत में समृ‍द्ध प्राचीन बौद्ध स्‍थल हैं जिनमें से अनेक महत्‍वपूर्ण स्‍थल भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े हैं। एक अनुमान के अनुसार इस समय दुनिया भर में करीब 500 मिलि‍यन बौद्ध हैं जिनमें से अधिकांश पूर्वी एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और सुदूर पूर्व देशों में रहते हैं। उनमें से बहुत मामूली प्रतिशत हर वर्ष भारत के बौद्ध स्‍थलों को देखने आता है। अत: बौद्ध स्‍थलों की यात्रा के लिए और अधिक पर्यटकों को प्रोत्‍साहित करने की संभावना है।
  • प्राचीन भारत ने दुनिया को बेशकीमती तोहफे के रूप में बुद्ध और उनका दिखाया हुआ मार्ग दिया है। भगवान बुद्ध की असाधारण शिक्षाएं, शान्ति, खुशहाली और सौहार्द का संदेश देती हैं। दूसरी तरफ यह बौद्ध विरासत के आठ महान स्‍थानों को दर्शाते हैं। इन आठों स्‍थानों का संबंध भगवान बुद्ध के जीवन की महत्‍वपूर्ण घटनाओं, उनके जन्‍म, ज्ञान, पीडि़त मानवता के लिए धम्‍म शिक्षा और उनके महापरिनिर्वाण से है। 
  • पूरे विश्व को प्राचीन भारत का सबसे बहुमूल्य उपहार है – भगवान बुद्ध और उनका मार्ग। मार्गों की संख्या आठ है। पाली भाषा में इसे “अत्तथांगिको मग्गू” कहा जाता है। अर्थ की दृष्टि से बुद्ध मार्ग के दो आयाम है। पहले आयाम के अंतर्गत बुद्ध के असाधारण उपदेश आते हैं। इस मार्ग को मध्य मार्ग भी कहा जाता है। जब हम इस मार्ग का अनुसरण करते हैं तो यह हमारे मस्तिष्क में पवित्रता लाता है और इससे हमें शांति, प्रसन्नता और सद्भाव का अनुभव होता है। बुद्ध मार्ग नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन की गुणवत्ता से संबंधित है।
  • दूसरे आयाम के अंतर्गत बुद्ध मार्ग बौद्ध विरासत के आठ महान स्थलों से संबंधित है। इसे पाली में अथमहाथाननी कहा जाता है। ये आठों स्थल बुद्ध के जीवन और उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं से संबंधित है। इसमें भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति, धर्म के उपदेश से लेकर मानवता द्वारा अनुभव किए जाने वाले दुःख और उनका महापरिनिर्वाण – सभी शामिल हैं।

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