राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द द्वारा ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ का उद्घाटन

  •  राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने 10 अगस्त, 2018 को लखनऊ में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना) बैठक का उद्घाटन किया। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है।
    राष्ट्रपति के अनुसार भारत में S.M.E. उद्यमों को अर्थ-व्यवस्था का मेरुदंड कहा जाता है। ये उद्यम समावेशी विकास के इंजन हैं। कृषि क्षेत्र के बाद सबसे अधिक लोग इन्ही उद्यमों में रोजगार पाते हैं। इन उद्यमों में अपेक्षाकृत कम पूंजी की लागत पर रोजगार के अधिक अवसर पैदा होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन उद्यमों के माध्यम से, ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रोजगार पैदा होते हैं। देश के सर्वाधिक M.S.M.E. उद्यम उत्तर प्रदेश में हैं। सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य, उत्तर प्रदेश में, हमारे डेमोग्राफिक डिविडेंड का सबसे अधिक उपयोग इन्ही उद्यमों में हो सकेगा।
  • देश के कुल हस्त-शिल्प निर्यात में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 44 प्रतिशत है। हस्त-शिल्प, फूड प्रोसेसिंग, इंजिनियरिंग गुड्स, कालीन, रेडी-मेड कपड़े, लेदर गुड्स में लगे उद्योगों से विदेशी मुद्रा और रोजगार दोनों ही दृष्टियों से लाभ होता है। इस प्रकार, उत्तर प्रदेश के विकास में S.M.E उद्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
  •  उत्तर प्रदेश की यह ‘ओ.डी.ओ.पी.’ योजना भी छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक M.S.M.E. उद्यमों के लिए सहायक परिस्थितियाँ उत्पन्न करेगी।
  • ‘ओ.डी.ओ.पी.’ योजना से स्थानीय कौशल और कलाओं का संवर्धन होगा, तथा उत्पादों की पहुँच बढ़ेगी। इससे उत्तर प्रदेश केहर जनपद में शिल्पकारों की आर्थिक प्रगति होगी।  जिन जिलों में विशिष्ट पहचान वाले उत्पादों की संख्या एक से अधिक है, वहाँ, अधिक रोजगार एवं विकास की संभावना वाले उत्पाद का चयन किया गया है। 
  •  ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना द्वारा पाँच वर्षों में पचीस हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के जरिए पचीस लाख लोगों को रोजगार दिलाने का लक्ष्य है।  इस योजना से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ-ही-साथ, राज्य के समग्र और संतुलित विकास को बल मिलेगा।
  •  समिट में, ‘ई-मार्केटिंग’, ‘ज़ीरो डिफ़ेक्ट–ज़ीरो इफ़ेक्ट’ और पूंजी निवेश में सहायता के लिए, यहाँ उपस्थित संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ, जो समझौता ज्ञापन किए गए हैं, उनसे जिला स्तर पर, उत्पादकों के लिए, नए अवसर प्राप्त होंगे।
  • ‘थिंक-ग्लोबल, ऐक्ट-लोकल’ की सोच के अनुसार, स्थानीय कौशल को प्रोत्साहन देकर, जनपदों के कई ऐसे उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार के लायक बनाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों के उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग है। लेकिन ऐसे बहुत से जिले और उत्पाद हैं जिन्हे, इस योजना द्वारा समुचित प्रोत्साहन देकर, उनकी क्षमता का व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है। कई नए ब्रांड विकसित किए जा सकते हैं। जब अंबेडकर नगर के वस्त्र-उत्पाद के कारीगर, और श्रावस्ती में ट्राइबल क्राफ्ट में लगे शिल्पी, राज्य सरकार से प्रभावी सहायता प्राप्त करेंगे, तो निश्चय ही उनका उत्साह बढ़ेगा, और उनके उत्पादों की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। उनके उत्पाद अधिक ‘मार्केटेबल’ हो सकेंगे।   
  •  इस योजना में, सभी उत्पादों से जुड़ी पूरी ‘प्रोसेस-चेन’ और ‘वैल्यू-चेन’ पर ध्यान दिया गया है।  इन प्रयासों के द्वारा उत्पादकों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क, और भी सुगम हो सकेगा।
  • केंद्र सरकार की स्किल इंडिया मिशन, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, रोजगार प्रोत्साहन योजना तथा ‘मुद्रा’ योजनाओं से, इस योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।   

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