एलसीए तेजस का हवा में तरल ईंधन भरने का परीक्षण सफल

  • भारतीय वायुसेना के बेस से 10 सितंबर, 2018 को एलसीए तेजस एमके-1 के लिए हवा में ईंधन (तरल ईंधन) (‘wet contact’ trial for LCA Tejas) भरने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इस सफलता को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और अंतिम परिचालन स्वीकृति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  • इस परीक्षण के पहले शुष्क ईंधन परीक्षण का कार्य 04 और 06 सितंबर, 2018 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था। हवा में ईंधन भरने की सफलता से आईएएफ के हल्के लडाकू विमान (एलसीए) की क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। इससे विमान का परिचालन लंबे समय तक हवा में किया जा सकेगा।

तेजस के बारे में

  • तेजस भारत में डिजाइन की हुयी, विकसित एवं विनिर्मित प्रथम एडवांस फ्रलाइ-बाय-वायर (एफबीडब्ल्यू) एयरक्राफ्रट है।
  • इसका विकास एयरोनॉटिकल विकास एजेंसी (एडीए) द्वारा किया गया है जबकि निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने किया है।
  • इस मिग-21 के स्थानापन्न हेतु विकसित किया गया है।
  • ग्लास कॉकपीट युक्त तेजस चौथी प्लस पीढ़ी का वायुयान है और यह उपग्रह समर्थित अत्याधुनिक नौवहन प्रणाली से लैस है।
  • भारतीय लाइट कौम्‍बैट एयर क्राफ्ट, ‘तेजस ‘ छोटा, हल्‍का, एक इंजनवाला, एक सीट, सुपरसोनिक और बहुआयामी होने के साथ ही विश्व में अपनी श्रेणी का एक उत्‍तम युद्धक विमान  है।
  • इसमें चार गुना डिजिटल, तार युक्‍त नियंत्रण प्रणाली तथा पर्याप्‍त सुरक्षा का ध्‍यान रखा गया है। तेजस के कोकपिट में उत्‍कृष्ठ श्रेणी के शीशे का उपयोग कर खुलने वाली प्रणाली अपनाई गई है जो पॉयलेट के अनुकूल रहती है।
  • तेजस एयर क्राफ्ट के चार भेदों (कौम्‍बैट चार भेद) लड़ाकू, प्रशिक्षण एवं नेवल भेदों को, स्‍थल तथा ढोने के लिए विकसित किया जा रहा है। तेजस  के लिए प्रारंभिक परिचालन मंजूरी-1 (आईओसी-1) 10 जनवरी 2011 को प्राप्‍त की गई थी।
  • तेजस को भारतीय वायुसेना के ‘45-स्क्वैड्रन’ में 1 जुलाई, 2016 को शामिल किया गया था। इस स्क्वैड्रन को ‘फ्लाइंग डैगर्स’ भी कहा जाता है।

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