सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कृषि विशेषज्ञों की समिति गठित

सर्वोच्च न्यायालय ने 12 जनवरी, 2021 को तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन को अगले आदेश तक लागू करने पर रोक लगा दी।

  • ये तीन कानून हैं पंजाब और हरियाणा में देश की सबसे अधिक कृषि मंडियां हैं और वहां के किसान मंडियों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य के लाभ को जानते हैं। कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम, 2020 ‘कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम, 2020 एवं तीसरा कानून आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020’ ।
  • सर्वोच्च न्यायालय की एक बेंच, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने की और जिसमे न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन शामिल थे, ने केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के बीचजारी गतिरोध को हल करने के लिए बातचीत की सुविधा के लिए कृषि विशेषज्ञों की एक समिति का भी गठन किया है ।
  • समिति के सदस्य हैं; भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष एचएस मान, महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घणावत; अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी।
  • यह समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी और इसकी पहली बैठक 10 दिन के अंदर आयोजित होगी।
  • उल्लेखनीय है की दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसान कई हफ्ते से आंदोलित हैं और तीनों कृषि कानूनों के वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं।
  • सरकार से आठ दौर की वार्ता का कोई हल निकला है इसलिए सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
  • वैसे कुछ विशेषज्ञ वर्तमान कृषि आंदोलन को एक विशेष राज्य और एक विशेष समूह तक सीमित बताया जा रहा है। कुछ हद तक इसमें सत्यता भी दिखती है सही भी है क्योंकि वर्तमान कृषि आंदोलन पंजाब और हरियाणा के किसानों की भागीदारी अधिक दिख रही है।
  • परन्तु इसका कारण भी है। इन तीनों कृषि कानूनों का सबसे अधिक प्रभाव पंजाब और हरियाणा में ही रहने वाला है। पंजाब और हरियाणा में देश की सबसे अधिक कृषि मंडियां हैं और वहां के किसान मंडियों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य के लाभ को जानते हैं।

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