बिहार की दो आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा

बिहार की दो आर्द्रभूमियों — गोकुल जलाशय (बक्सर) और उदयपुर झील (पश्चिम चंपारण) — को रामसर साइट (रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि) का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही, भारत की कुल रामसर साइट की संख्या बढ़कर 93 हो गई है, जो 13,60,719 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती है।

बिहार में रामसर साइट की सूची

  • 2025 – गोकुल जलाशय और उदयपुर झील को जोड़ा गया।
  • 2024 – नागी और नकटी पक्षी अभयारण्य शामिल किए गए।
  • 2023 – कांवर झील (बेगूसराय) को सूची में शामिल किया गया।

यह बिहार की आर्द्रभूमि संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण में बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।

रामसर अभिसमय के बारे में

  • रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) की स्थापना 1971 में हुई थी।
  • यह आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • इसका नाम ईरान के शहर रामसर पर रखा गया है और इसका सचिवालय ग्लैंड, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

आर्द्रभूमियों का महत्त्व

  • पारिस्थितिक संतुलन – आर्द्रभूमियाँ समृद्ध जैव विविधता का आश्रय हैं और महत्वपूर्ण पर्यावासों को बनाए रखती हैं।
  • आपदा न्यूनीकरण – ये प्राकृतिक अवरोधक के रूप में कार्य करती हैं, बाढ़ के समय अतिरिक्त जल को रोकती हैं और सूखे के समय में काम आती हैं, जिससे बाढ़, सूखा और चक्रवात के जोखिम कम होते हैं।

परिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ – जल शुद्धिकरण, भूजल पुनर्भरण, जलवायु विनियमन और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका प्रदान करती हैं।

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