भारत-EFTA ‘व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA)’ 1 अक्टूबर को लागू हुआ

  • TEPA 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ।
  • इस पर हस्ताक्षर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में किए गए थे।
  • EFTA के चार सदस्य देश हैं – स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड।
  • TEPA एक आधुनिक और महत्वाकांक्षी समझौता है, जिसमें निवेश और रोजगार सृजन की प्रतिबद्धता पहली बार शामिल की गई है।

मुख्य विशेषताएँ

  • समझौते में कुल 14 अध्याय शामिल हैं।
  • ये अध्याय वस्तुओं की बाज़ार पहुंच, रूल ऑफ ओरिजिन, व्यापार सुविधा, व्यापार उपाय, सेनेटरी और फाइटो-सेनेटरी उपाय, तकनीकी बाधाएं, निवेश प्रोत्साहन, सेवाएँ, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार और सतत विकास, तथा कानूनी प्रावधानों पर केंद्रित हैं।
  • EFTA की पेशकश – 100% गैर-कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों (PAP) पर टैरिफ रियायत।
  • भारत की पेशकश – 82.7% टैरिफ लाइनों को कवर करती है, जो EFTA के 95.3% निर्यात के बराबर है।
  • EFTA ने भारत के 99.6% निर्यात को कवर करते हुए 92.2% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी है।
  • सोने पर प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है (EFTA के भारत को आयात का 80% से अधिक हिस्सा सोना है)।

निवेश और रोजगार संबंधी लक्ष्य

  • TEPA के अनुच्छेद 7.1 के अनुसार, EFTA देश 10 वर्षों में भारत में 50 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करेंगे।
  • अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करेंगे।
  • कुल 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश लक्ष्य है।
  • इन निवेश प्रवाहों से भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन किया जाएगा।

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