केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय दलहन मिशन’ को मंज़ूरी दी

राष्ट्रीय दलहन मिशन : मंत्रिमंडल की स्वीकृति

  • 1 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय दलहन मिशन’ (National Pulses Mission) को मंज़ूरी दी, जिसका उद्देश्य देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाना, पोषण को सुदृढ़ करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
  • लक्ष्य है कि 2024–25 में 24.2 मिलियन टन से उत्पादन बढ़ाकर 2030–31 तक 35 मिलियन टन तक पहुँचाया जाए।

मुख्य प्रावधान

  • 416 ज़िलों में विशेष उत्पादन और विस्तार कार्यक्रम लागू होंगे।
  • इन कार्यक्रमों में चावल की परती भूमि में खेती, उच्च गुणवत्ता वाले बीज (ब्रीडर/फाउंडेशन/प्रमाणित बीज), सहफसली खेती (intercropping), सिंचाई, बाज़ार संपर्क और तकनीकी सहयोग शामिल होगा।
  • तुर, उड़द और मसूर की 100% MSP पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को पूरा लाभ मिले।
  • वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए मिशन को ₹11,440 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

भारत में दाल उत्पादन की स्थिति

  • भारत की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ खरीफ़, रबी और ग्रीष्म, तीनों मौसमों में 12 प्रकार की दालों की खेती का समर्थन करती हैं।
  • उत्पादन क्षेत्रीय रूप से केंद्रित है—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान अकेले लगभग 55% योगदान करते हैं। शीर्ष दस राज्य मिलकर राष्ट्रीय उत्पादन का 91% से अधिक हिस्सा कवर करते हैं।

महत्त्व और चुनौतियाँ

  • दाल उत्पादन में अंतराल को दूर करना आयात पर निर्भरता घटाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है।
  • कुल उत्पादन का लगभग 80% वर्षा-आधारित क्षेत्रों पर निर्भर है। यह क्षेत्र 5 करोड़ से अधिक किसानों और उनके परिवारों की आजीविका बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण है।

पिछली स्थिति और प्रगति

  • 2015–16 में उत्पादन घटकर 16.35 मिलियन टन रह गया था, जिसके कारण 6 मिलियन टन का आयात ज़रूरी हुआ।
  • भारत सरकार के गहन प्रयासों से उल्लेखनीय प्रगति हुई।
  • 2022–23 तक उत्पादन 59.4% बढ़कर 26.06 मिलियन टन हो गया।
  • उत्पादकता में भी 38% की वृद्धि दर्ज हुई।
  • आयात पर निर्भरता 29% से घटकर 10.4% रह गई।

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