रेलवे स्टेशनों का लाल, नारंगी व हरा में वर्गीकरण


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने ‘जल (प्रदूषण का उपशमन एवं नियंत्रण) एक्ट, 1974 (Water (Prevention & Control of Pollution) Act, 1974) के तहत प्राप्त विशेष अधिकार का उपयोग करते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश जारी किया है कि वह अपशिष्ट जल सृजन के आधार पर भारतीय रेलवे के विभिन्न स्टेशनों का वर्गीकरण करे।

इस तरह अब से भारतीय रेलवे स्टेशनों को उनके द्वारा सृजित अपशिष्ट जल व बिना शोधन किये गये जोड़े गये इन जलों के आधार पर लाल, नारंगी एवं हरा रंग में वर्गीकृत किया जाएगा।

लाल रंग श्रेणी के स्टेशनः वैसे रेलवे स्टेशन जो 100 किलो लीटर दैनिक (केएलडी) से अधिक का अपशिष्ट जल सृजित करेगा, उसे लाल श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

नारंगी रंग श्रेणी के स्टेशनः वैसे रेलवे स्टेशन जो 10 किलो लीटर दैनिक (केएलडी) से अधिक और 100 किलो लीटर दैनिक (केएलडी) से कम अपशिष्ट जल सृजित करेगा, उसे नारंगी रंग का स्टेशन माना जाएगा।

हरा रंग श्रेणी के स्टेशनः वैसे रेलवे स्टेशन जो 10 किलो लीटर दैनिक (केएलडी) से कम अपशिष्ट जल सृजित करेगा, उसे हरा रंग के स्टेशन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

जिन उद्योगों को चलाने के लिए अनुमति प्रदान की गई थी उनमें रेलवे का उल्लेख नहीं था। इस संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगी गई थी। इसी के पश्चात नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भारतीय रेलवे को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का निर्देश दिया था।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डः केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board: CPCB), एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था। इसके अलावा, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अधीन भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनलः राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal: NGT) की स्थापना 18.10.2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के तहत पर्यावरण बचाव और वन संरक्षण और अन्य प्राकृतिक संसाधन सहित पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार के प्रवर्तन और क्षतिग्रस्त व्यक्ति अथवा संपत्ति के लिए अनुतोष और क्षतिपूर्ति प्रदान करना और इससे जुडे़ हुए मामलों का प्रभावशाली और तीव्र गति से निपटारा करने के लिए किया गया है। 

Written by 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *