कैबिनेट ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पुनर्पूंजीकरण को मंजूरी दी

आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 2019-20 के बाद एक और वर्ष के लिए यानी 2020-21 तक आरआरबी को न्यूनतम नियामकीय पूंजी प्रदान कर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया ( recapitalization of Regional Rural Banks : RRBs ) को जारी रखने को अपनी स्वीकृति दी है।

इसके तहत उन आरआरबी को न्यूनतम नियामकीय पूंजी दी जाएगी जो 9% के ‘पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात ( Capital to Risk weighted Assets Ratio: CRAR )’ को बनाए रखने में असमर्थ हैं, जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्‍ट नियामकीय मानदंडों में उल्‍लेख किया गया है।

    सीसीईए ने आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना के लिए केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में 670 करोड़ रुपये (यानी 1340 करोड़ रुपये के कुल पुनर्पूंजीकरण सहयोग का 50%) का उपयोग करने को भी मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसमें यह शर्त होगी कि प्रायोजक बैंकों द्वारा समानुपातिक हिस्सेदारी को जारी करने पर ही केंद्र सरकार का हिस्सा जारी किया जाएगा।

पृष्‍ठभूमि:

आरआरबी के पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) के लिए प्रकटीकरण मानदंडों को मार्च 2008 से लागू करने संबंधी आरबीआई के निर्णय को ध्‍यान में रखते हुए डॉ. के.सी. चक्रबर्ती की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।

समिति की सिफारिशों के आधार पर ‘आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना’ को कैबिनेट ने 10 फरवरी, 2011 को आयोजित अपनी बैठक में मंजूरी दी थी, ताकि विशेषकर पूर्वोत्‍तर क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र में कमजोर आरआरबी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए आकस्मिक निधि के रूप में 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि के साथ 40 आरआरबी को 2,200 करोड़ रुपये की पुनर्पूंजीकरण सहायता प्रदान की जा सके। अत: हर साल 31 मार्च को आरआरबी के सीआरएआर की जो स्थिति होती है उसके आधार पर ही राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) उन आरआरबी की पहचान करता है, जिन्हें 9% के अनिवार्य सीआरएआर को बनाए रखने के लिए पुनर्पूंजीकरण संबंधी सहायता की आवश्यकता होती है।

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