प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान)

  • केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) को प्रभावी और तेजी से लागू करने में सहायता करने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है ताकि हकदार लाभ किसानों को शीघ्रता से हस्तांतरित किया जा सके।
  • मुख्यमंत्रियों को भेजे अपने पत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री ने लिखा है कि इस योजना के तहत छोटे किसान परिवारों का चयन राज्य सरकारों को करना है। बैंक खाते जैसे आवश्यक विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने हैं ताकि लाभ की पहली किस्त इन पात्र परिवारों के खातों में हस्तांतरित की जा सके।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट में   घोषणा की गई परंतु यह 1 दिसंबर, 2018 से लागू हुयी है।
  • दो हेक्टेयर तक की जोत वाले सभी भूस्वामी किसान इस योजना के लाभार्थी हैं।
  • प्रतिवर्ष 6000 रुपए की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता किसानों को दी जाएगी। यह 2000 रुपए के तीन तीन किश्तों में दी जाएगी। इस योजना से 12 करोड़ किसानों को लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है।
  • योजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार गांव में पात्र लाभार्थी भूमि धारक किसान परिवारों का डाटाबेस तैयार करेंगे। इनमें नाम, आयु, लिंग, श्रेणी (एससी/एसटी), आधार नम्बर (अगर आधार नम्बर जारी नहीं किया गया है तो पहचान के उद्देश्य से आधार नामांकन संख्या के साथ कोई अन्य निर्धारित दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, नरेगा जॉब कार्ड या केंद्र/ राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों या उनके अधिकारियों द्वारा जारी किया गया कोई अन्य पहचान दस्तावेज), बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड आदि का विवरण शामिल होंगे। हालांकि मोबाइल नम्बर अनिवार्य नहीं है। लेकिन यह सलाह दी जाती है कि जब भी मोबाइल नम्बर उपलब्ध हो तो उसे तुरंत डाटाबेस में शामिल किया जाए ताकि लाभ की स्वीकृति/ हस्तांतरण से संबंधित जानकारी लाभार्थी को दी जा सके। राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करेंगे की पात्र परिवारों को हस्तांतरित भुगतान का दोहराव न हो। लाभार्थी के गलत/ अपूर्ण बैंक विवरण का तेजी से समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  •  लाभ हस्तांतरण में सहायता के लिए देश में उपलब्ध एकीकृत प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए पीएम-किसान (http://pmkisan.nic.in) नामक पोर्टल की एक समान संरचना में एकल वेब पार्टल में एसएमएफ विवरण अपलोड करने के लिए शुरूआत की गई है। इस पत्र में आगे यह कहा गया है कि राज्य स्तर से ग्रामीण स्तर तक प्रशासनिक मशीनरी की प्रतिबद्ध भागीदारी बहुत आवश्यक है ताकि इस योजना को समय पर लागू किया जा सके।   

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