नेत्रहीनों के लिए प्रकाशन पर मर्राकेश संधि का अमेरिका बना 50वां सदस्य

संयुक्त राज्य अमेरिका 8 फरवरी, 2019 को विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन की मर्राकेश संधि का 50वां सदस्य बना।
संगठन के मुताबिक अमेरिका, जो कि अंग्रेजी भाषा की पुस्तकों का सबसे बड़ा प्रकाशकों में से एक है, के शामिल होने से इस संधि को और बल मिलेगा।

मर्राकेश संधि

  • मर्राकेश समझौते का मुख्य लक्ष्य नेत्रहीनों, दृष्टि बाधित व्यक्तियों के लाभ के लिए अनिवार्य सीमाओं और अपवादों के एक संकलन का निर्माण करना है। यह अनुबंधकारी पार्टियों द्वारा राष्ट्रीय विधि प्रावधानों के अनुपालन से ब्रेल जैसे स्वीकृत रुपों में प्रकाशित कार्यों के पुनर्निर्माण, वितरण तथा उपलब्धता सुनिश्चित कराने के जरिए किताबों की भीषण कमी की समस्या को दूर करने में सहायक होगा।
  • साथ ही, यह समझौता ऐसे संगठनों, जो उनकी सेवा करते हैं, को इन पुस्तकों के विभिन्न देशों में आदान प्रदान की अनुमति भी देगा। जैसे ही मर्राकेश समझौता लागू हो जाएगा, यह भारत में लाखों नेत्रहीनों और दृष्टि बाधित व्‍यक्तियों के लिए प्रकाशित पुस्‍तकों तक पहुंच सुलभ करा देगा। यह उनके लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों तथा समान अधिकारों को सुनिश्चित कराने में भी मददगार साबित होगा। 
  • इस संधि पर 27 जून, 2003 को हस्ताक्षर हुआ था और 20 देशों की अभिपुष्टि के पश्चात यह 30 सितंबर, 2016 को प्रभावी हो गया।
  • इस संधि को अभिपुष्टि करने वाला भारत पहला देश था। भारत 30 जून, 2014 को इसकी अभिपुष्टि किया था। यह समझौता दृष्टिहीनों के लाभ के लिए काम करने वाले शैक्षिक संस्थानों, पुस्तकालयों जैसे भारत के अधिकृत संगठनों द्वारा सदस्य देशों से सुलभ फॉरमेट प्रतियों के आयात में भी सहायक साबित होगा। यह समझौता भारतीय भाषाओं में सुलभ फॉरमेट के आयातित प्रतियों के अनुवाद तथा सुलभ फॉरमेट प्रतियों के निर्यात में भी मददगार साबित होगा। भारतीय कॉपीराइट (संशोधन) एक्ट, 2012 मर्राकेश समझौते के अनुरुप है। 

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