‘एटमोस्‍फेयर एंड क्‍लाइमेट रिसर्च – मॉडलिंग आबर्जविंग सिस्‍टम्‍स एंड सर्विसेज’ को मंजूरी

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने समग्र योजना ‘एटमोस्‍फेयर एंड क्‍लाइमेट रिसर्च – मॉडलिंग आबर्जविंग सिस्‍टम्‍स एंड सर्विसेज’(एसीआरओएसएस) (Atmosphere & Climate Research-Modelling Observing Systems & Services (ACROSS) की नौ उप-योजनाओं को 1450 करोड़ रूपये की अनुमानित  लागत से 2017 से 2020 तक की अवधि के दौरान जारी रखने के लिए अपनी मंजूरी दी।
  • इनका पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), भारतीय उष्‍णकटिबंध मौसम विज्ञान संस्‍थान (आईआईटीएम), नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वैदर फॉरकास्टिंग (एनसीएमआरडब्‍लयूएफ) और भारतीय राष्‍ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) जैसे अपने संस्‍थानों के माध्‍यम से कार्यान्‍वयन करेगा।
  •  मंत्रिमंडल की आर्थिक समिति ने 2020-21 और इससे आगे की अवधि के दौरान 130 करोड़ रूपये की वित्‍तीय प्रतिबद्धता के साथ नेशनल फेसिलिटी फॉर एयरबोर्न रिसर्च (एनएफएआर) की स्‍थापना करने के लिए भी अपनी मंजूरी दी है।
  • एसीआरओएसएस योजना पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय से संबंधित हैं जो चक्रवात, तूफान, लहर, तेज गर्मी और गरज के साथ बारिश होना जैसे विभिन्‍न पहलुओं से निपटती है।
  • इसका हर पहलू एसीआरओएसएस समग्र योजना के अधीन नौ उप-योजनाओं के रूप में शामिल हैं और उपरोक्‍त चार संस्‍थानों के माध्‍यम से एकीकृत तरीके से कार्यान्वित है।
  • एसीआरओएसएस योजना 9 उप-कार्यक्रमों से मिलकर बनी हैं जो बहु-विषयक और बहु-संस्‍थानीय स्‍वरूप की है। यह आईएमडी, एचआईएम, एनसीएमआरडब्ल्यूएफ और आईएनसीओआईएस के माध्यम से एकीकृत तरीके से कार्यान्वित की जाएगी।
  • एसीआरओएसएस योजना का उद्देश्‍य समाज की बेहतरी के लिए एक विश्वसनीय मौसम और जलवायु पूर्वानुमान प्रदान करना है। इसलिए योजना का उद्देश्‍य कृषि-मौसमविज्ञान संबंधी सेवाएं, विमानन सेवाएं, पर्यावरण संबंधी निगरानी सेवाएं, जल-मौसमविज्ञान संबंधी सेवाएं, जलवायु सेवाएं, पर्यटन, तीर्थयात्रा, पर्वतारोहण जैसी सभी सेवाओं को अंतिम उपयोगकर्ता तक समय पर पहुंचाने के कार्य को सुनिश्चित करने के लिए सतत अवलोकनों, गहन अनुसंधान विकास और प्रभावी विस्‍तार और संचार रणनीतियों को प्रभावी रूप से अपनाकर मौसम और जलवायु पूर्वानुमान की कुशलता में सुधार लाना है। 

प्रभाव

  • यह योजना उन्‍नत मौसम जलवायु और महासागर के बारे में पूर्वानुमान और  सेवाएं उपलब्‍ध कराएगी। इस प्रकार इससे सार्वजनिक मौसम सेवा आपदा प्रबंधन, कृषि-मौसमविज्ञान संबंधी सेवाएं,विमानन सेवाएं, पर्यावरण संबंधी निगरानी सेवाएं, जल-मौसमविज्ञान संबंधी सेवाएं, जलवायु सेवाएं, पर्यटन, तीर्थयात्रा, विद्युत उत्‍पादन, जल प्रबंधन, खेल और साहसिक कार्य आदि विभिन्‍न सेवाओं के अनुरूप लाभों का हस्‍तांतरण सुनिश्चित होगा।  

रोजगार के अवसरों का सृजन

  • बड़ी संख्‍या में वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों के साथ-साथ आवश्‍यक प्रशासनिक सहायता की जरूरत के कारण रोजगार का सृजन।
  • अंतिम उपभोक्‍ता तक मौसम आधारित सेवाओं का अंतिम मील तक जुड़ाव सुनिश्चित करने से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के कृषि विज्ञान केंद्र, विश्‍वविद्यालय और स्‍थानीय नगर पालिकाएं जैसी एजेंसियां बड़ी संख्‍या में इसमें शामिल होंगी। इस प्रकार अनेक लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्‍ध होंगे।
  • विवरण:-
  • पृष्ठभूमि:
  •       पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पास मौसम, जलवायु और प्राकृतिक खतरे से संबंधित घटनाओं का पूर्वानुमान करने के लिए क्षमता का विकास और सुधार करने हेतु अनुसंधान और विकास गतिविधियों को आयोजित करने का अधिकार है। इस दिशा में मंत्रालय ने अवलोकन प्रणालियों और बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी करने, विशेष अभियानों के माध्‍यम से प्रक्रियाओं को समझना, मौसम और जलवायु मॉडलिंग,मानसून अनुसंधान, जलवायु परिवर्तन विज्ञान और जलवायु सेवाएं आदि  के माध्यम से  विशिष्ट योजनाओं को तैयार करने के लिए कई पहल की हैं। इन येाजनाओं में अनेक संस्‍थान शामिल हैं जिनमें प्रत्‍येक इकाई की उपरोक्त कार्यों को पूरा करने के लिए भूमिका निर्धारित है। इसके परिणामस्‍वरूप विशिष्ट उद्देश्य और बजट के साथ ये सभी योजनाएं एकीकृत तरीके से लागू की गई हैं और इन्‍हें समग्र एसीआरओएसएस योजना के तहत शामिल किया गया है। 

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