संगीत नाटक अकादमी वेब अभियान “सांझी-मुझ में कलाकार” के दूसरे चरण की शुरूआत

  • गीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी, संगीत नाटक अकादमी (एसएनए) वेब अभियान “सांझी-मुझ में कलाकार” (‘SĀNJHI –MUJH MEIN KALĀKĀR) के दूसरे चरण की शुरूआत करेगी। यह अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) तथा सीधे जन भागीदारी द्वारा विविध सांस्कृतिक विरासतों को विकसित और प्रोत्साहित करने की दिशा में एक पहल है।
  • यह एक विशिष्ट प्रतिभा खोज है जिसमें भागीदार संगीत, नृत्य, नाटक, कठपुतली, लोक और जनजातीय कलाओं,  पाक कौशल, चित्रकला और मूर्ति कला जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। सांझी शब्द का शाब्दिक अर्थ बांटना और साझा करना है। हमारे देश की सांस्कृतिक परंपराओं ने देश में सद्भाव की धारणाओं को विकसित और समृद्ध किया है।
  • इस अभियान के दूसरे चरण “सांझी-मुझ में कलाकार” क्षेत्र में लोक, परंपरागत, प्रथागत, सामाजिक, विधि-विधान वाले कला रुपों के बारे में विशेष रुप से ध्यान केन्द्रित किया गया है। इन कलारूपों को जनवरी के फसल उत्सव मौसम में सांस्कृतिक ताने-बाने के रुप में बुना गया है। इस फसल उत्सव को पूरे देश में मकर सक्रांति, लोहड़ी, भोगली बिहू, तोरग्य, उत्तरायण, अट्टूकल पोंगल जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। इसके पीछे ऐसे रूपों को सामने लाने की एक अभिलाषा है जो यूनोस्को के तहत आईसीएच की सुरक्षा के सम्मेलन के अनुसार अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों से जुड़ी है।
  • इस अभियान का पहला चरण दिवाली उत्सव के दौरान नवम्बर 2018 में शुरू किया गया था। इसमें भारी उत्साह के साथ जबर्दस्त जन भागीदारी रही। लोगों ने संगीत, नृत्य, कविता पाठ आदि के विभिन्न ऑडियो-वीडियो अपलोड किए। इसके अलावा चित्रकला, दस्तकारी, टेराकोटा कार्य, रंगोली, लिखित कविता आदि दृश्य कलारूपों के भी ऑडियो-वीडियो अपलोड किए। देश के विभिन्न् क्षेत्रों से 500 से भी अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। विभिन्न सांस्कृतिक निकायों और प्रख्यात कलाकारों को शामिल करके गठित जांच समिति को देश के प्रतिभा भंडार को देखने का सुअवसर मिला और अनेक कलाकारों को पदोन्नति देने और प्रशंसा के योग्य माना गया।
  • संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की नोडल एजेंसी है। यह अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और विभिन्न यूनेस्को सम्मेलनों से संबंधित मामलों को समन्वित करने के लिए भारत की सांस्कृतिक विविधता, विविध सांस्कृतिक परंपराओं और अभिव्यक्तियों का प्रचार और प्रसार करती है।  

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